हरितघर- भाग 4

कृष्ण गोपाल वैष्णव

3 जंगल संरक्षण

जंगल संरक्षण का अर्थ व्यापक है। पेड़-पौधे हमारे जीवन की अमूल्य निधि हैं, जो हमारे पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक स्थिति को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों से मानव समुदाय को अनेक बहुमूल्य वस्तुएं प्राप्त होती हैं। जिनमें स्वच्छ जल, वन्य प्राणियों के रहने के लिए स्थान, लकड़ी, भोजन, फर्नीचर, कागज अनेक वस्तुएं जिनके अभाव में जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।

“हरित घर’ में जंगल संरक्षण से तात्पर्य घरेलू उद्यान से है। घर में कम से कम पांच औषधीय पौधे हमको लगाने चाहिए। घर की छत पर गमलों या अन्य उपयुक्त पात्रों में पौधे एवं सब्जियां भी उगाई जा सकती हैं। घर में खाली पड़ी भूमि पर भी पौधे लगाये जा सकते हैं। औषधीय पौधों में पुदीना, अदरक, हल्दी, एलोविरा, तुलसी, गिलोय, धनिया, मेथी, लहसुन आदि उगाए जा सकते है। घर के अंदर विभिन्न स्थानों पर ऑक्सीजन देने वाले पौधे लगाए जा सकते हैं। घर में पंचवटी के अनुसार बड़, पीपल, बिल्वपत्र, सीता अशोक, आंवला के पौधे घर मे लगाए जा सकते हैं। जब थोड़े बड़े हो जाये तब उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित कर उनके स्थान पर नए पौधे लगा सकते हैं।
घर का वातावरण पर्यावरण अनुकूल होने से नई पीढ़ी को भी पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।

निरन्तर…….

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