“विष मुफ्त रसोई” कार्यशाला का आयोजन कर ग्रामीणों केमिकल मुक्त फल – सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया

आजकल हम सभी जो भी खाते हैं, वो पूर्ण रूप से शुद्ध नहीं होता है। कुछ ना कुछ मिलावट और केमिकल्स वगैरह खाने पीने की चीजों में जरूर होती है। इसके पीछे का कारण है कि हम सब ने जैविक खेती को कहीं बहुत दूर छोड़ दिया है। अपने रोजमर्रा की जिंदगी में हम अनजाने तरीके से शरीर में केमिकल्स को पहुंचा रहे हैं। जो आने वाले समय के लिए हमारे शरीर में एक खतरनाक बीमारी पैदा कर सकती है।

ऐसे में अब समय आ गया है कि एक बार फिर से हम सब जैविक खेती की ओर चलें। हमारे बीच कुछ ऐसे लोग हैं जो इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। हरियाणा के कृषि विश्वविद्यालय के तत्वाधान में ‘विषमुक्त रसोई’ के विषय पर डॉ राजपाल और डॉ हंसराज ने राजली गांव में कुछ लोगों के साथ चर्चा की।

उन्होंने केमिकल मुक्त फल और सब्जी के फायदे को बताते हुए आग्रह किया कि वह लोग भी केमिकल का प्रयोग खेतों में ना करें। उन्होंने बताया कि बाजार में मिलने वाले रासायनिक व केमिकल युक्त भोजन हमारे शरीर के लिए कितने हानिकारक होते हैं। इस कार्यशाला के जरिए ग्रामीणों को यह समझाने की कोशिश की गई कि हमें अपनी प्रकृति की ओर फिर से लौटना है।

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ऐसे लोगों को धन्यवाद समर्पित करती है। जो पर्यावरण के प्रति पूरी निष्ठा के साथ लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। ऐसे में हम सबका दायित्व है कि अपने घर में केमिकल मुक्त बगिया बनाने का प्रयास करें। अगर आप अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो अपने घर में केमिकल मुक्त गार्डन अवश्य बनाए।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x