भाखड़ा नंगल में 1.5 एकड़ “वृक्षयुर्वेद वन” तैयार किया जा रहा है जिसमें 30+ किस्मों के 3000+ पौधे हैं-पंजाब

मानव जीवन की विकास यात्रा में बांधों का हमेशा से ही बहुत बड़ा योगदान रहा है। बांधो से न केवल पानी का भंडारण संभव है, बल्कि बाढ़ को भी नियंत्रित किया जाता है। पंजाब के सतलुज नदी पर स्थित भाखड़ा नांगल बांध, भारत का सबसे मार्मिक वास्तुशिल्प चमत्कार है। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई और बिजली उत्पादन है।

यह बाँध भाखड़ा नांगल परियोजना के अंतर्गत निर्मित किया गया है। इस विशालकाय बांध का निर्माण 1948 में शुरू हुआ और इसे पूर्ण होने में 15 वर्ष लग गए। वही अक्टूबर 2013 में भारत सरकार ने बांध की 50 वीं वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए डाक टिकट जारी किए थे।यह पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्य की सीमा पर स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा सीधा गुरुत्वाकर्षण वाले बांध के रूप में जाना जाता है। यह वैभवशाली बांध हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस शानदार संरचना को देखकर लोग आश्चर्य और रोमांच से भर उठते हैं।

इस बांध के सौंदर्य को बढ़ाने का कार्य पर्यावरण हितैषी लोगों द्वारा किया जा रहा है। जहां 1.5 एकड़ बंजर भूमि को “वृक्षायुर्वेद वन” में परिवर्तित करने वृक्षारोपण अभियान
चलाया जा रहा है। यहाँ 30 किस्मों के 3000 से अधिक पौधे लगाए गए। सुंदर भाखड़ा नंगल बांध के प्राकृतिक सौंदर्य में इस छोटे से मानवीय प्रयास से वृद्धि होगी। वही यह पर्यटकों के लिए अधिक रमणीय हो जाएगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित यह प्रयास सभी के लिए अनुकरणीय है और सभी को प्रोत्साहित करने वाला है।

 

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