जल: आज, कल और परसों

जल क्या है, क्या हम जो पीते हैं जिससे हम सफाई करते हैं क्या बस वही जल है। नहीं, जल है तो दुनिया है, नहीं तो कुछ भी नहीं। सोचो अगर जल ना होता तो शायद दुनिया में अनाज भी ना होता, इंसान भी ना होता, और यह जीव जंतु भी ना होते। यह तो सब जानते हैं पृथ्वी पर 71% जल है। परंतु यह दिन-ब-दिन घट रहा है ।

भारत में एक ऐसा शहर है। जिसका नाम मराठवाडा है वहां सिर्फ 5 दिन में एक बार पानी आता है वो भी सिर्फ 40 मिनट के लिए और यहां हम कार को धोने में लगभग 150 से 250 लीटर और दुपहिया वाहन को धोने में 60 से 70 लीटर तक पानी व्यर्थ बहाते हैं। कई इलाकों में जल प्राप्त करना ही एक बड़ी समस्या है। चेन्नई में पानी प्राप्त करना इतना कठिन है कि आप और हम सोच भी नहीं सकते यहां पानी लेने के लिए महिलाओं को कई घंटों तक पैदल चलना पड़ता है और कई मुसीबतों का भी सामना करना पड़ता है। यह तो हुई देश की बात अब विश्व में केपटाउन जहां आप हाथ भी नहीं धो सकते वहां पाने का इतना स्तर घट गया है की आप पानी को सिर्फ पी सकते हैं और हाथ धोने के लिए सैनिटाइजर का प्रयोग कर सकते हैं । दुनिया में और भी ऐसी जगह है जहां पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलता वहां यूनाइटेड नेशन रिसर्च टीम ने ऑलगलो नामक पाउडर बनाया है जिसे पानी में घोल में पानी की गंदगी नीचे बैठ जाती है।

जहां गंगा नदी को मां के समान समझते हैं। वही सिर्फ एक शहर से सैकड़ों नाले गंगा में गिरते हैं। और हर वर्ष कई लाख टन कचरा गंगा में फेंका जाता है। गंगा नदी को साफ करने में 4000 लाख रुपए लगाए जा चुके हैं। पर जब तक हर व्यक्ति अपने कर्तव्य को नहीं समझेगा तब तक गंगा पूर्ण रूप से साफ नहीं हो सकेगी और यही गंगा का पानी कई घरों में आता है। जिससे कई बीमारियाँ होने का खतरा है। अगर हम ऐसे ही पानी व्यर्थ करते रहेंगे, तो वह दिन दूर नहीं जब हमें सच में चुल्लू भर पानी में ही रहना पड़ेगा। अगर हम आज नहीं सुधरे तो क्या पता कल हमारे लिए हो ना हो।

हमने अपने बचपन की किताबों में तो यह जरूर पढ़ा होगा, कि किसान नहरों, तालाबों से अपने खेत को सींचता है पर शायद अब तक किसी को यह भी नहीं पता होगा कि नहर और तालाब कैसे दिखते हैं। भारत में हर वर्ष 1170 मी.मी बारिश होती है। जिसमें सिर्फ 6% ही स्टोर किया जाता है अगर हम बारिश के पानी को संरक्षित कर सके तो उसका कई स्थानों पर प्रयोग कर सकते हैं। और शायद हमारे इस प्रयास से किसी की प्यास बुझ सके क्योंकि हमारी एक लापरवाही के कारण कई लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। इसलिए आज एक एक बूंद बचा कर हम अपना तथा समस्त जीव जगत का भविष्य मंगलमय कर सकते हैं ।

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Manish Pathak
Admin
10 months ago

Very good article.

Dr Bhavtosh Sharma
Dr Bhavtosh Sharma
4 months ago

सही बात है, जल है तभी जीवन भी है

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