छात्रों द्वारा विश्व जल दिवस के अवसर पर ली गई जल संरक्षण की शपथ -काशी

जब पृथ्वी पर मानव जीवन के अस्तित्व की बात आती है तो जल एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन बन जाता है। लेकिन अत्यधिक दोहन के कारण जलस्तर दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। हम मनुष्यों ने प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को बिना समझे उनका दोहन किया और आवश्यकता पड़ने पर अनुपलब्धता के कारण उनके लिए तरसते भी हैं ।फिर भी हम जल संसाधनों का शोषण करते रहते हैं। यही उचित समय है, जब हम इन संसाधनों के महत्व को पहचाने व जल संसाधनों का संरक्षण कर , मानव सभ्यता के भविष्य को भी सुरक्षित करे।काशी प्रांत के छात्र और शिक्षक इस संसाधन की रक्षा और संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, काशी प्रांत एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुशल नेतृत्व में परिसर में विश्व जल दिवस के अवसर पर  जल संरक्षण अभियान मे विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय, प्रबंध अध्ययन संकाय, फार्मेसी संस्थान, दत्तोपंत ठेंगड़ी संस्थान तथा प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया संस्थान के  सभी विद्यार्थियों एव  शिक्षकों ने विश्व जल दिवस के अवसर पर जल संरक्षण अभियान में सहभागिता दी ।

सभी लोगो ने जल संरक्षण हेतु जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से उपलब्ध कराए गए शपथ को दोहरा कर जल संरक्षण मे अपनी सहभागिता एवं अपने परिवारजनों ,मित्रों एवं पड़ोसियों को भी इसके विवेकपूर्ण उपयोग और इसे व्यर्थ न करने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया ।

इस अवसर पर पर्यावरण विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विवेक कुमार पाण्डेय ने सभी को संबोधित करते हुए बताया कि पूरे विश्व में पृथ्वी पर दो तिहाई भाग में जल है, परंतु उसमें केवल 1% जल पीने योग्य है। जिसमें संपूर्ण पीने योग्य जल का 4% भारत में उपलब्ध है जबकि भारत की जनसंख्या को दृष्टिगत रखते हुए 16 से 17% जल की आवश्यकता है अतः हमें जीवन को संरक्षित करने के लिए प्रकृत्ति द्वारा उपलब्ध जल का सदुपयोग करने की जरूरत है l अगर हम आज नहीं जागे तो कल हमें शुद्ध जल पीने के लिए प्राप्त नहीं होगा। हमें हर कदम पर जल संरक्षण के लिए सोचना होगा l आज के समय में हर शहर एवं गांव पानी के संकट से जूझते नजर आ रहे हैं। सेकेंड स्ट्रेटा से हमने पानी का दोहन करना शुरू कर दिया है l हम फसल की सिंचाई एवं वाहनों की धुलाई हेतु शुद्ध जल का उपयोग करते हैं जो की पूर्णतः अनुचित है।हमें चाहिए की उपयोग किए गए जल को एकत्रित करके इन कार्यों को संपन्न करें l साथ ही साथ हर घर से निकलने वाले आरो मशीन के वेस्ट वाटर का उपयोग हम अपने लान की सिंचाई, वाशिंग मशीन में कपड़े की धुलाई एवं टॉयलेट आदि हेतु कर सकते हैं l इस तरह से हमें जल का कम से कम उपयोग करते हुए अपने आने वाली पीढ़ियों के लिए भी इन्हे संरक्षित करने की आवश्यकता है l हमें अपने घरों में वर्षा जल संचय की व्यवस्था (रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ) बनाने की जरूरत है जिसमें हम छतों पर एकत्रित पानी से  (रूफ वाटर) से भूमिगत जल को रिचार्ज कर सकें।

इस अवसर पर आचार्य विक्रम देव, आचार्य अजय द्विवेदी, डॉ. आशुतोष सिंह,  डॉ. रशिकेस,  डॉ. सुशील कुमार, डॉ. विनय वर्मा, डॉ. परमेंद्र विक्रम सिंह तथा राजेश कुमार ,डॉ उपेंद्र यादव ,डॉ. राकेश उपाध्याय, डॉ. राजेश कुमार यादव ,डॉ.सुधांशु शेखर यादव , ऋषि श्रीवास्तव, डॉ. दिनेश कुमार, इशानी, श्री कालीचरण सेठ, मनोज कुमार त्रिपाठी, अनुपम, बलराम एवं शिवकुमार आदि उपस्थित थे l

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments
0
Would love your thoughts, please comment.x
()
x